What is knowledge ?, Who is the enemy of wisdom?
ज्ञान क्या है ?, कौन है ज्ञान का शत्रु?
ज्ञान की श्रेणी इस सब से काफी उच्च है | परन्तु आज के समय में कुछ विशेष वर्ग को ज्ञानी कहा जाने लगा है जैसे एक विद्यार्थी जिसने 99% Marks अपनी class में ले आया तो हम उसको ज्ञानी कहते है और 55% वाले को अज्ञानी ये ज्ञान का माप दण्ड नहीं हैं|
ज्ञान को बहुमूल्य रत्नों से भी अधिक मूल्यवान कहा गया है|
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| Knowledge Is Power. |
ज्ञान का अर्थ क्या है ?
वास्तविक ज्ञान क्या है ?
बड़ी बड़ी किताबो पोथी आदि से घिरा व्यक्ति ज्ञानी है ये कभी नहीं कहा जा सकता, इसी प्रकार किसी के ज्ञान का अंदाजा उसकी उम्र से भी नहीं लगया जा सकता |
“कोई सिर के बाल श्वेत होने से वृद्ध नहीं होता। बालक होकर भी यदि कोई ज्ञान सम्पन्न है तो वही वृद्ध माना जाता है।” ~ (महर्षि व्यास)
अगर एक पंक्ति में ज्ञानी व्यक्ति के बारे में कहना हो तो कहा जा सकता है जो व्यक्ति सही समय पर सही फैसले बिना किसी भेदभाव के पूर्ण निष्पक्षता के साथ लेता है वो ही ज्ञानी है ऐसे व्यक्ति पढ़े हुए ज्ञान को जीवन में उतारते है|
एक पंडित जी थे जिनके पास कई झोला भर कर किताबे थी और उनकी बदोलत वे बहुत ज्ञानी माने जाते थे पूरे गांव में किसी को भी समस्या होती वह पंडित जी के पास आता और अपनी समस्या बताता पंडित जी भी उसकी समस्या सुनते और किताबो को देखते और उसकी समस्या का हल बता देते व्यक्ति ख़ुशी ख़ुशी अपने घर को चला जाता इसलिए सभी पंडित जी को बहुत ज्ञानी मानते थे एक दिन पंडित जी अपनी किताबो के साथ दूसरे राज्य में जा रहे थे रस्ते में उन्हें डाकू का काफिला मिल गया डाकुओ ने पंडित जी को घेर लिया और बोले जो कुछ सब हम को दे दे तब आगे जा वरना जान से हाथ धोना पडेगा
पंडित जी सहम गये और धीरे से बोले मेरे पास तो कुछ नहीं है "झोले में बस किताबे है"
डाकुओ ने बोला, "ठीक है, वो ही दो हम उन्हें बेच के पैसे कमा लेंगे"
और डाकुओ ने झोला छीन लिया ये देख कर पंडित जी रोने लगे और रोते हुए बोले "इन्ही किताबो के सहारे मेरी जिन्दगी चलती है जब भी कोई अपनी समस्या लाता है तो मैं किताबो से देख कर ही उन्हें समाधान दे पाता हूँ|"
डाकुओं का सरदार हंसा और झोला फेकते हुए बोला "तेरे ऐसे ज्ञान का क्या फायदा जो किताबे ना होने पर किसी काम का नहीं | किताबो के सहारे जी रहां है और खुद को ज्ञानी समझता है"
पंडित जी को वास्तविक ज्ञान की शिक्षा आज एक डाकू से मिली थी |
अत: ऐसे ज्ञान का क्या मतलब जो किसी पर निर्भर रह कर रहे | Real Knowledge तो वही हुई ना जो हमको स्वयं पर निर्भर बनाये हम अपनी समस्यों का समाधान अपने विवेक से कर सके|
बेकन ने कहा है - “ज्ञान ही शक्ति है।”
ज्ञान ख़ुद में वर्तमान है, इन्सान सिर्फ़ उसका अविष्कार करता है।
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| source: Google Image (Gyaan Kya hai) |
मनुष्य का शत्रु अज्ञान है |
चाणक्य ने कहा है “अज्ञान के समान मनुष्य का और कोई दूसरा शत्रु नहीं हैं।
“अज्ञान ही अन्धकार है।”
“अज्ञानी रहने से जन्म न लेना ही अच्छा है, क्योंकि अज्ञान ही समस्त विपत्तियों का मूल है।”
जिस प्रकार एक पेड़ बिना जड़ के खड़ा नहीं रह सकता उसका जीवन व्यर्थ होने लगता है उसी तरह संसार में बिना ज्ञान के जीवन जीना अभिश्राप है| ~अंशुल गुप्ता
अज्ञान से बड़ा शत्रु है ज्ञान का भ्रम
ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु अज्ञानता नहीं, बल्कि ज्ञान होने का भ्रम होना है। -स्टीफन हाकिंग
अतः, हमें जीवन भर एक विद्यार्थी बने रहना चाहिए। ज्ञान एक अनंत महासागर है, और हम इसमें से केवल कुछ बूँदें ही पी पाते हैं। हमें अपने भीतर से "मैं सब जानता हूँ" के अहंकार को मिटाना होगा। याद रखें, अपनी अज्ञानता को स्वीकार करना बुद्धिमानी की निशानी है, लेकिन अधूरे ज्ञान को पूर्ण मानकर बैठ जाना मूर्खता है। वास्तविक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को जानता है और निरंतर सीखने के लिए तत्पर रहता है।
I Hope, आपको ये लेख "Gyaan Ka Sabase Bada Shatru Agyaanta Nahin, Gyaan Ka Bhram Hai in Hindi" पसंद आया होगा|



nice
ReplyDeletetopic
Tnq
Deleteachi jankari hai
ReplyDeleteNice article Anushul. Keep Writing informative posts. Gud luck
ReplyDeleteलेख पढने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |
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